रात 2 बजे का हाईवे सफर: एक अनजानी खौफनाक औरत
रात 2 बजे का हाईवे सफर उस रात घड़ी ने जैसे ही 2 बजने का इशारा किया, पूरा हाईवे एक अजीब खामोशी में डूब गया था। दूर-दूर तक कोई गाड़ी नहीं, सिर्फ मेरी कार की हेडलाइट्स और अंधेरा… इतना गहरा कि लगता था जैसे निगल जाएगा। मैं, रोहित, एक लंबा सफर तय कर रहा था। काम से देर हो गई थी, और अब घर पहुंचने की जल्दी में मैंने इस सुनसान रास्ते को चुना। मुझे नहीं पता था कि ये फैसला मेरी जिंदगी का सबसे खौफनाक अनुभव बनने वाला है। अचानक दिखी वो औरत कुछ किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद, मेरी नजर अचानक सड़क के किनारे खड़ी एक औरत पर पड़ी। उसने सफेद साड़ी पहन रखी थी और उसके बाल चेहरे पर बिखरे हुए थे। उसकी खामोश खड़ी आकृति किसी अजीब डर को जन्म दे रही थी। रात के इस वक्त, इस वीरान हाईवे पर… कोई औरत अकेली क्यों खड़ी होगी? मैंने ब्रेक लगाने के बारे में सोचा… लेकिन दिल ने कहा, "मत रुक।" फिर भी, इंसानियत के चलते मैंने गाड़ी धीरे कर दी। लिफ्ट की मांग जैसे ही मैंने गाड़ी उसके पास रोकी, उसने धीरे से अपना चेहरा उठाया। उसकी आंखें… बिलकुल खाली थीं, जैसे उनमें कोई जान ही नहीं हो। "मुझे आगे तक छोड़ द...